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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश में 900 नई अदालतों के गठन में राज्य सरकार की धीमी कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक इस मामले पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया, तो मुख्य सचिव और विधि परामर्शी (एलआर) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि सरकार ठोस निर्णय लेने के बजाय नए और बेबुनियाद सवाल उठाकर अदालतों के गठन की प्रक्रिया को टाल रही है। अदालत ने इस कार्यप्रणाली को अस्वीकार्य बताया और कहा कि न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित अदालतों का गठन आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की एक उच्चस्तरीय समिति ने अक्टूबर 2024 में पहले चरण में 900 नई अदालतें स्थापित करने पर सैद्धांतिक सहमति दी थी। इन अदालतों में 225 एचजेएस स्तर, 375 सिविल जज सीनियर डिवीजन और 300 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालतें शामिल हैं। न्यायालय के सख्त रुख के बाद, राज्य सरकार की ओर से अंतिम अवसर देने का अनुरोध किया गया। इसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने अगली सुनवाई तक इस मामले में निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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900 नई अदालतों के गठन में देरी पर हाईकोर्ट नाराज:अगली सुनवाई तक फैसला न होने पर मुख्य सचिव को पेश होने का आदेश














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