संभल कोर्ट ने 5 दोषियों को उम्रकैद सुनाई:66-66 हजार का जुर्माना लगाया, छेड़छाड़ का मुकदमा वापस न लेने पर मारपीट, पति की मौत




संभल कोर्ट ने सात साल पुराने हत्याकांड मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी पर 66-66 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। दोषियों ने एक पुराने मुकदमे में समझौता करने का दबाव बनाने के लिए घर में घुसकर पति-पत्नी और बेटे से मारपीट की थी, जिसमें पति की मौत हो गई थी। यह घटना संभल जनपद की तहसील गुन्नौर के थाना धनारी क्षेत्र के गांव बगढ़ेर की है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉस्को एक्ट) अवधेश कुमार सिंह ने बुधवार को यह सजा सुनाई। जिन दोषियों को आजीवन कारावास मिला है, उनमें गांव बगढेर निवासी महानंदन, गिलीचंद्र उर्फ गिरीश, नेकपाल पुत्र अनेगी सिंह, राहुल और राकेश पुत्र गिलीचंद्र शामिल हैं। इन्हें करऊ पुत्र प्यारेलाल की हत्या का दोषी पाया गया है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता हरिओम प्रकाश उर्फ हरीश सैनी ने बताया कि न्यायालय ने आदेश दिया है कि अर्थदंड की आधी राशि मृतक की पत्नी को दी जाए और शेष राशि राज्य सरकार के पक्ष में जमा की जाए। घटना 24 सितंबर 2017 की दोपहर की है। महानंदन, गिलीचंद्र उर्फ गिरीश, नेकपाल, राहुल और राकेश ने करऊ के घर में घुसकर उस पर 19 सितंबर 2017 को दर्ज कराए गए एक मुकदमे को वापस लेने का दबाव बनाया। जब करऊ ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की। मारपीट में करऊ, उसकी पत्नी राजवती और बेटा राजेश घायल हो गए। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुन्नौर में भर्ती कराया गया। करऊ की हालत गंभीर होने पर उसे मुरादाबाद रेफर किया गया, लेकिन सुधार न होने पर मेरठ रेफर कर दिया गया। मेरठ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। न्यायालय ने 27 अप्रैल 2024 को घटना में शामिल पांचों अभियुक्तों को दोषी करार दिया था। उस समय सभी आरोपी जमानत पर थे और न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए। इसके बाद, 5 मई को महानंदन, गिलीचंद्र उर्फ गिरीश और नेकपाल ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। 11 मई को राकेश ने आत्मसमर्पण किया, जबकि राहुल को थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।



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