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झारखंड के सभी कॉलेजों में इसी सत्र से लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम के विरोध के बाद राज्य सरकार ने इसके स्वरूप में बदलाव किया है। अब किसी भी कॉलेज में वैसे विषयों की पढ़ाई बंद नहीं होगी, जिनमें छात्रों की संख्या पर्याप्त है। केवल उन्हीं विषयों को सीमित या बंद किया जाएगा, जिनमें छात्र बहुत कम रुचि लेते हैं और नामांकन कम होता है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय अधिकारियों और कॉलेज प्राचार्यों के साथ लगातार दो दिनों तक बैठक की। इन बैठकों में इस नए फार्मूले पर सहमति बनी। मंगलवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने रांची यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और रांची के कॉलेज प्राचार्यों के साथ बैठक की थी। -शेष पेज 9 पर सरकार: मुख्य के साथ अन्य विषय की पढ़ाई होगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि हर कॉलेज का एक मुख्य अकादमिक चरित्र तय रहेगा। यानी किसी कॉलेज को साइंस, किसी को सोशल साइंस, किसी को ह्यूमैनिटीज या जनजातीय भाषा का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। लेकिन अन्य विषयों की पढ़ाई पूरी तरह बंद नहीं होगी। जिन विषयों में पर्याप्त छात्र होंगे, वहां पढ़ाई जारी रहेगी। हालांकि उड़िया और बांग्ला जैसे विषयों पर संकट बना रह सकता है, क्योंकि इनमें छात्रों की संख्या काफी कम बताई जा रही है। राजधानी के कॉलेजों में क्या बदलाव आएगा राम लखन सिंह यादव कॉलेज : जनजातीय भाषा और ह्यूमैनिटीज के लिए चयनित किया गया था। अब अन्य विषयों की पढ़ाई भी जारी रहेगी, यदि छात्र होंगे। डोरंडा कॉलेज : पहले साइंस आधारित कॉलेज के रूप में विकसित करने की योजना थी। अब सोशल साइंस व अन्य विषयों की पढ़ाई होगी। जेएन कॉलेज, धुर्वा : सोशल साइंस क्लस्टर में शामिल इस कॉलेज में अब दूसरे विषय भी संचालित होंगे। हालांकि उन्हीं कीपढ़ाई होगी, जिनमें छात्रों की संख्या पर्याप्त होगी। एसएस मेमोरियल कॉलेज : यहां भी सोशल साइंस के साथ अन्य विषयों की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। इसके लिए संबंधित विषयों में पर्याप्त छात्र संख्या जरूरी होगी। कॉलेज… एडमिशन के लिए सीटों का फिर से पुनर्गठन होगा सरकार से सहमति मिलने के बाद कॉलेजों में एडमिशन सीटों का पुनर्गठन किया जाएगा। जिस विषय के लिए किसी कॉलेज को क्लस्टरिंग में प्राथमिकता दी गई है, उसमें सबसे अधिक सीटें रहेंगी। अन्य विषयों की सीटें सीमित की जा सकती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त सीटें नहीं बढ़ाई जाएंगी। कॉलेजों को उपलब्ध संसाधनों और वास्तविक नामांकन के आधार पर ही अनुमति मिलेगी। जानिए…क्या है क्लस्टर सिस्टम क्लस्टर सिस्टम के तहत एक क्षेत्र के कई कॉलेजों को अकादमिक रूप से आपस में जोड़ा जाता है। इसमें हर कॉलेज को कुछ विशेष विषयों के लिए केंद्र बनाया जाता है, ताकि संसाधनों और शिक्षकों का बेहतर उपयोग हो सके। सरकार का मानना है कि इससे कम छात्र संख्या वाले विषयों पर होने वाला खर्च घटेगा और कॉलेजों में विशेषज्ञता विकसित होगी। वहीं विरोध करने वालों का कहना है कि इससे छात्रों की विषय चयन की स्वतंत्रता प्रभावित होगी और उन्हें दूसरे कॉलेजों में जाकर पढ़ाई करने में परेशानी होगी। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है आगे… एडमिशन शेड्यूल का रास्ता साफ: 12वीं के रिजल्ट आ गए हैं, लेकिन अब तक यूजी में नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। रांची यूनिवर्सिटी ने पहले शेड्यूल जारी किया था, पर क्लस्टरिंग सिस्टम लागू होने के कारण विषय मैपिंग पूरी नहीं होने से उसे वापस लेना पड़ा। अब विषय मैपिंग और एडमिशन शेड्यूल का रास्ता साफ हो गया है।
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क्लस्टर सिस्टम: सरकार बैकफुट पर, छात्रों के डिमांड वाले विषय बंद नहीं होंगे












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